प्रेसमैन टाइम्स

सरकार के नोटबंदी के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा छह साल पहले 2016 में 500 रुपये और 1,000 रुपये के मूल्यवर्ग के नोटों को बंद करने के फैसले को 4:1 के बहुमत से बरकरार रखा। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, बी आर गवई, ए एस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यन सहित बहुमत ने माना कि केंद्र की 8 नवंबर, 2016 की अधिसूचना वैध थी और आनुपातिकता के परीक्षण से संतुष्ट थी। जबकि असहमति का फैसला सुनाते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, 'केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई नोटबंदी गैरकानूनी थी'। 



याद कीजिए जब नोटबंदी के ठीक पांच दिन बाद गोवा में पीएम ने कहा था… ‘मैंने सिर्फ देश से 50 दिन मांगे हैं। 50 दिन। 30 दिसंबर तक मुझे मौका दीजिए मेरे भाइयों बहनों। अगर 30 दिसंबर के बाद कोई मेरी कमी रह जाए, कोई मेरी गलती निकल जाए, कोई मेरा गलत इरादा निकल जाए, आप जिस चौराहे में मुझे खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर के…देश जो सजा करेगा वो सजा भुगतने के लिए तैयार हूं।’

जरा सोचिए, देश के प्रधान सेवक ने जब मंच से यह बात कही होगी तो देश के प्रति कितनी बड़ी जिम्मेदारी, नागरिकों के प्रति कितनी बड़ी जवाबदेही के साथ ये बात कही होगी, इसका अनुमान आज लगाया जा सकता है, जब सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार के नोटबंदी के इस फैसले पर मुहर लगा दी है और सरकार के इस दूरदर्शी फैसले को क्लीन चिट दे दिया है। कोर्ट ने इसी के साथ नोटबंदी को लेकर डाली गई सारी याचिकाओं को खारिज भी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को सुनाते हुए केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा है। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा है कि यह निर्णय कार्यकारी की आर्थिक नीति होने के कारण उलटा नहीं जा सकता है।


सुप्रीम कोर्ट की दलील

अपने फैसले को सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और आरबीआई के बीच नोटबंदी से पहले सलाह-मशविरा हुआ था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के उपाय को लाने के लिए दोनों के बीच एक समन्वय था। कोर्ट ने यह भी कहा है कि नोटबंदी की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। RBI के पास विमुद्रीकरण लाने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है और केंद्र सरकार और RBI के बीच परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया। खैर, ये तो हुई सरकार के नोटबंदी के फैसले पर कोर्ट द्वारा क्लीन चिट की बातें। चलिए जानते हैं नोटबंदी कैसे एक दूरदर्शी फैसला साबित हुआ।


साफ-सुथरी अर्थव्यवस्था

नोटबंदी के लगभग 6 साल हो चुके हैं। साल 2016 में रात आठ बजे पीएम मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐलान किया था। इसमें कोई दो राय नहीं कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पहले से काफी साफ-सुथरी हुई। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा। बिचौलियों और जालसाजों पर रोक लगी। ऐसे लोगों के अंदर डर पैदा हुआ। असंगठित क्षेत्र संगठित हुआ क्योंकि इसने गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंचने में हमारी मदद की। नोटबंदी का सबसे खास प्रभाव यह हुआ कि राजस्व बढ़ा।


करदाता बढ़े, बैंकिंग सिस्टम सुधरा

नोटबंदी के बाद करदाताओं की संख्या में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 7 सितंबर 2021 तक बढ़कर 8.83 करोड़ करोड़ हो गई।

नोटबंदी के बाद काले धन का पता लगाना काफी आसान हो गया है। यही कारण है कि 98-99 फीसदी नकदी बैंकिंग सिस्टम में आ गए हैं। अनुमानित है कि नोटबंदी के फैसले के बाद 24.75 लाख ऐसे संदिग्ध मामलों की पहचान की गई, जिनमें पैन कार्ड धारकों के प्रोफाइल नोटबंदी के पहले के प्रोफाइल से मेल नहीं खाते।

क्रय शक्ति समानता यानी पीपीपी के आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पीपीपी के हिसाब से वैश्विक जीडीपी (Global GDP) में भारत की हिस्सेदारी 2021 में 10.22 फीसदी पहुंच गई। दूसरे शब्‍दों में समझें तो दुनिया की कुल जीडीपी में भारत की हिस्‍सेदारी 10,510 अरब डॉलर रही।


विमुद्रीकरण

नोटबंदी की घोषणा के बाद विमुद्रीकरण के दौरान बैंक खातों में भारी नकद राशि जमा की गई तथा इस नकद राशि के मालिक का पता करना संभव हुआ। आयकर विभाग ने विमुद्रीकरण की स्‍कीम के दुरुपयोग में लिप्‍त पाए गए लोगों पर सख्ती से कार्रवाईयां भी की।


डिजिटल लेनदेन

नोटबंदी के फैसले डिजिटल भुगतान के लिए काफी फायदेमंद रही।नोटबंदी के फैसले के बाद प्री-पेड वॉलट्स में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। नवंबर 2016 में जहां यूपीआई आधारित ट्रांजेक्शन सिर्फ 90 करोड़ रुपए का था, वहीं अक्टूबर-2021 में यह बढ़कर 6.5 लाख करोड़ हो गया है। इस दौरान 3.65 बिलियन यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए। देखा जाए तो आज कार्ड स्वाइप मशीन लगभग हर छोटे-बड़े दुकानों पर देखने को मिल रहे हैं। लोग घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे हैं। और समय के साथ ऑनलाइन शॉपिंग में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। खाने-पीने की चीजें हों या कपड़े, पिक्चर हॉल के टिकट हों या स्कूल या कोचिंग फीस, लोग पेमेंट्स कार्ड के रूप मं प्लास्टिक मनी या डेबिट, क्रेडिट कार्ड का काफी प्रयोग कर रहे हैं। आज हम सब्जी ले रहे हों या दूध, चाय पी रहे हों या कोई और छोटी-मोटी लेनदेन कर रहे हों, हर विक्रेता के पास ऑनलाइन पेमेंट्स अकाउंट हैं और क्रेता सीधे उनके अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं।


डिजिटल लेनदेन से फायदा 

डिजिटल लेनदेन में नोटबंदी का काफी फायदा देखने को मिला। यूपीआई मोड से होने वाले लेनदेन का आंकड़ा अक्टूबर 2021 में 100 अरब डॉलर को पार कर गया। डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा है और यह नोटबंदी के पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हुआ है।

नोटबंदी के पहले बैंकों की ब्याज दर 1 अक्टूबर, 2016 धन की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) एक माह के लिए 8.95 प्रतिशत और साल के लिए 9.05 थी। नोटबंदी के बाद से एमसीएलआर में बैंकों ने कटौती की और 15 सितंबर 2021 को सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) एक माह के लिए 6.65 प्रतिशत और साल के लिए 7.0 प्रतिशत ही रह गई है।

2004-05 के बाद एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मंदी की तरफ जाने से देश की आर्थिक वृद्धि दर घटते-घटते 2013 में 4.4 प्रतिशत तक आ गई थी। जबकि एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर इस साल घटकर 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है, जबकि 2021 में यह 8.2 प्रतिशत रही थी।

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